लाडू गोविन्द देव, कै लाडू गोपी नाथ।
लाडू का परसाद नै, पसर्या रैवै हाथ॥
पसर्या रैवै हाथ, पवनसुत नै भी भावै।
लाडू सामैं मेल, जैन महावीर रिझावै॥
पारबती झल्लाय, पूत छै जात बिगाडू।
गास्यो ले न गणेस थाळ में जै न हो लाडू॥