करै घमड़को झेरणो, कर नेता को साथ।

लुण्या को लौंदो बधै, होय चिकणा हाथ॥

होय चिकणा हाथ, मट्‌ठो पाड़ोसी पावै।

घर में रांभै गाय, मजो धीणा को आवै॥

पौ फाटी जद बजी घड़ावळ हो गयो तड़को।

घणी दोवणी करै धिराणी करै घमड़को॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बिहारी शरण पारीक ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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