राज-कचेड़ी पूगग्या, भोंदूमल जी आज।

दफ्तर सारो सोधियो सर्‌यो कोई काज।

सर्‌यो कोई काज, संभाळ्या खुदरा खूंजा।

अफसर बाबू मांग रैया, पग-पग पर पूजा।

कह निधड़क कविराय बात रो लेवो लेखो

स्वच्छ प्रसासन न्याय मिलै है किसड़ो देखो॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शिवराज छंगाणी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 13
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