दूहा


पारंभ करी परमेसरी, केहर चढ़ी सकोप।
असुर तणा दल आयनै, अड़ीया सन्मुख ओप॥

रगत नेंण रातं मुखी, रातंबर रो साल।
सहस भुजे हथीयार सझि विड रूपण वैताल॥

असुर जिकै असलामरा, मिलीया वेढक मल्ल।
देवीनैं देतां दलै, हूकल लागी हल्ल॥

छंद पाढगति

हल्ल हल्ल लागी हूक टोलै ऊडै लोह टूक।
सागिड़दा गिड़दा वाजैसोक वेरियां विचाळ।
सणणवहंत सर सूरिमा फिरै समर।
गड़ड़ वाजंत गोळा नाग्ड़िग्ड़िदा नाळ॥

गाग्ड़ि ग्ड़िदा गाजै गज ढाळां सोहे नेज धजा।
हेंवरां नरां हैंखार पामिजै न पार।
सीहणी पलाणी सीह वेरियां तणो न बीह।
हाग्ड़ि ग्ड़िदा हथियार हीबती हजार॥

दागिड़ गिड़दा दीयै दोट चाग्ड़ि ग्ड़िदा चोट चोट।
ईसरी रहे न ओट झूंझे झाझे झूल।
खांडा तणी खाटि खड़ धाग्ड़ि ग्ड़िग्ड़िदा पाड़ै धड़ा।
बटका भरंती बाळ त्रीबीया त्रिसूल॥

ना ग्ड़िदा घुरै नीसाण जंग मातो जम राण।
जाग्ड़ि ग्ड़िदा ढाल जांगी सिंधुड़े सबद्द।
धुंआ माण धिधिकट नारद नाचै निकट।
ताग्ड़ि ग्ड़िदा तता थेइ वाचंतो विहद्द॥

फाग्ड़िदा भरंति फाल केवयांह हवाल काल।
खलकै रूहिर खाल गोड़ीया गयंद।
दोपीया निजर दीठ रोस माथै पाड़ै रीठ।
छाग्ड़िदा उतारै छाक माल्हती मयंद॥

खाग्ड़िग्ड़िदा थाट थाट झाग्ड़िग्ड़िदा दीयै झाट।
विढंती आराण वीच वाढंती विहंड।
महादेव मछराल माग्ड़िग्ड़िदा रुंडमाळ।
सोहे हीयड़ै सिणगार पाड़ीया प्रचंड॥

देत दलां लागी लीक भगवती निरभीक।
त्राहि त्राहि तुंही तुंही राखि राखि राखि।
महामाई महामाई पांण छोड़ कर आया पाय।
पाग्ड़िग्ड़िदा पालिपालि भाग्ड़िग्ड़िदा भाखि॥

कळस


नागिड़ गिड़दा भाखि असुर ज्युं तूळ उड़ायें।
निह स पड़ै नीसाण छोह अरियणां छुड़ाये।
जागिड़ गिड़दा जैत सुजस दह दिसे सवाइ।
राग्ड़ि गिड़दा रूप मेर समवड़ महामाइ।
खेरीयो खाग सन्नां सिरे हार मनावी हूकळे।
जिनहरख नमो बलि योगिणी वखंतावर आखां बळे॥

स्रोत
  • पोथी : जिनहर्ष ग्रंथावली ,
  • सिरजक : जिनहर्ष मुनि 'जसराज' ,
  • संपादक : अगरचंद नाहटा ,
  • प्रकाशक : सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम
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