तेथ पहरी ज पांन, जेथ वोह रीज सेन्या।
तेथ से वायस, बुग जीत सावळ व्रनां।
छाजक ना एक जंघ, त्रिया गति राज कहावै।
अंन सी जरि वर संण्य, संड विण तब वेयावै।
वंन फळां अहार जपीयै विसंन, एला एक आवध घंणां।
वड रूंख विरख वातां कर, तेथ अंबर ज झांभ तंणा॥