साख साख मिळि भाख लाख लाखीक लसक्कर।

च्यारि चक्क नव खण्ड हिलै फौजां गज डंबर॥

कसमस्सै कौरम्म सेस नागेंद्र सळस्सळि।

सात समंद गिरि आठ ताम धर मेर टळट्टळि॥

करि कोप दळां प्रारंभ कहर धेधिंगर आगै धरै।

मांडियौ मुगल्लै मारुवै रिण औरंग जसराज रै॥

स्रोत
  • पोथी : वचनिका राठौड़ रतनसिंघजी महेशदासौत री ,
  • सिरजक : खिड़िया जग्गा ,
  • संपादक : काशीराम शर्मा, रघुवीरसिंह ,
  • प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन, दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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