हिंदुवाण तुरकाण करण घमसाण कड़क्खै।
सझि कबाण गुण बाण दळां प्रारंभ बळ दक्खै॥
भड़ भिड़ज्ज गज धज्ज घड़ा चतुरंग कसस्सै।
सिंधुव सद्द रवद्द नद्द नीसाण निहस्सै॥
चत्रवाह साह दोय राह चढ़ि सझि फौजां दोवै समथ।
विचि झंड थंड मंडे वडा करिवा भारथ अेम कथ॥