देखो म्हांरी धीरज शक्ति, म्हे माफ कियां जावां थानै।
म्हारै हकां नै थे भोगो हो, ऊंचा बैठ्या छानै-छानै॥
रम, रमणी स्यूं रमता रैह्या, चाल्या ऊजड़ छोड्यो रस्तो।
पद रै मद में भरमायोड़ा, कर जुल्म लूट्यो सुख सस्तो॥
म्हे चावां तो ईं ऊचोड़ै, महलां में आग लगा देवां।
मिनटां में मटियामेट करां, शासन रो नशो भगा देवां॥
जे अपणी पर उतर आया, तो खूनी नदी बहाद्यांला।
छिप्यां नै छोडांला कोनी, चुग चुग नै ठेट पुंचाद्यांला॥
थे राजदण्ड रा भागी हो, मत घात करो भायां सागै।
थे तुल्या देश डुबोवण नै, आ बात नहीं आछी लागै॥
आ लागी लाय काळजै में, अंग-अंग में आग समाई है।
कै तो म्हे खुद ही जळ जास्यां, कै थांरी सामत आई है॥