जे थानार होय,

ते थाय

हूँ तो नातरे जाऊं

वना नातरा ना मनक

दुखी दुखी हैं।

एक चक्की नो आटो

सारा नो वाटों

एकस् धणी ने सेडे सेडे

चक्कर काटो।

कोदरा ना बुबसां खाते खाते

थाकी पड़्या

लापी ने शीरा ना हवाद

मुडें आवीरया हैं।

जो घोरवारा

नातरे जावा ने रौके

तोऐ हूं जांई

वोट क्लब हाको मारी

घाट उपर भजन करतै

अप्पा करैं। बएं।

जाना दे रे जावा दे नातरै।

नवों तो रुपानी रकमै लावियौ।

मनै तो इज हाऊ लागै।

जे मन मारू मांगै

आज ‘क’ पार्टी तो कालै ‘ख’ पार्टी

मै भमै।

एवा भमता राम थकी

मन मारू रमै

जे नवी नवी थारी मई जमै

मोटियार...ने बइयरै...हामरौ हो कोई

बरपी पेड़ा नवा धणी ने घोर थाई

हूँ तो नातरे जाईं

जे थानार होय थाई।

स्रोत
  • पोथी : वागड़ अंचल री राजस्थानी कवितावां ,
  • सिरजक : छगन लाल नागर ,
  • संपादक : ज्योतिपुंज ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादनी बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण