मकड़ी रा जाळा ज्यूं

उळझ्योड़ी गळियां

जादूगर रा तास-पत्तां ज्यूं

खड़ी मीनारां

आंख्यां देख चूंधीजै

स्हैर मांय

मिनख कीड़ा ज्यूं रेंग है

ओक-दूजै सूं डरै है।

छिपै है सांप ज्यूं बिल मांय

अंधारै माय निकळे

बडै अंधारै मांय

मिनख

मिनख सूं डरै है

बातां सूं कतरावै है

स्हैर

भूत लागै है।

स्रोत
  • पोथी : मंडाण ,
  • सिरजक : हुसैनी वोहरा ,
  • संपादक : नीरज दइया ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ,
  • संस्करण : Prtham