कांटै नै दाबती

मोचड़ी बोली

मोथा!

मैं तेरै के सहारै हूं।

घायल होयो

कांटो उत्तर दियो

छाकड़ी!

जात को कांटो हूं

मरेड़ां नै

कोनी सताऊं।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भगवतीप्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 11
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