इतिहासकारां इतिहास मांड्यो

पण बै मांड कोनी पाया

साची बात

बां करी–

राज सिंघासण री गुलामी।

आपां बीं गुलामी नैं बांच’र,

मूछ्यां रै बंट लगावां

करां हां-

कूड़ै इतिहास माथै गुमान।

जे इतिहासकार

साची बात मांडता तो

पकायत ईं मांड्यो जांवतो

राजियै भांभी रो इतिहास

क्यूं कै बण करी ही

ईं बेगार प्रथा रै खिलाफ

बगावत।

जदी तो बींनै

जींवतै नैं

दाब दियो

मेहराणगढ़ दुरग री नींव मांय।

पैलां रा इतिहासकार

गुलाम हा राजसिंघासण रा

पण, गुलाम तो आज रा

इतिहासकार है

पुरस्कार अर सत्ता रा।

स्रोत
  • पोथी : राजस्थली लोकचेतना री राजस्थानी तिमाही ,
  • सिरजक : सतीश सम्यक ,
  • संपादक : श्याम महर्षि ,
  • प्रकाशक : मरुभूमि शोध संस्थान
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