हूयग्या सबद

गळगळा

उमड़ आयो नीर

नैणां मांय

ऊभी हूयगी

पीड़

वियोग री,

अर ठमगी

कलम

उकेरीजगी

उनमै अर संवेदणा री

साची कविता

अन्तस् रै पानै माथै।

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत ,
  • सिरजक : कमल किशोर पिपलवा ,
  • संपादक : भगवतीलाल व्यास
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