कोई कैवै बाबा साब तो

मिंदर सारु इतियासू आंदोलन चलावै।

पण पछै बै भी मिंदर वाळी भीड़ नै

स्कूल रो रस्तो दिखावै।

आज जद थे

मिंदर मांयनै पग धरतां ही

लठ खाओ

तो फेर, थे के मिंदर

धूड़ खाण जावो।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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