करसी पैलां कदैई

म्हारै देस री

रीढ़ ही

अबै तौ कुरसी-

म्हारै देस री रीढ़ व्हैगी है

जदैई तौ

कुरसी मिळता

हरेक तण जावै

अर कुरसी जावतां

वै गूड़क जावै

स्रोत
  • पोथी : सावचेत रैणौ है ,
  • सिरजक : मदन डागा ,
  • प्रकाशक : साहित्यागार जयपुर