आज्या मेरी प्यारी किरकिट की कॉमेण्ट्री

तेरे बिनां अणमणूं है मेरो ट्रांजिस्टर

तू आवै ज्यूँ नई बीनणीं घर में आवै

अर घर हाळा दिनगे सैं चा'पाणी पीकै

कुरसी मुड्डा घाल, चाव सैं दरी बिछाकै

बैठ्या बैठ्या छिण छिण तेरी बाट उडीकै

घर हाळा ही नहीं कबीलै का, पड़ौस का

सगळा भेळा होरया मिस मिसेज अर मिस्टर

तेरै आणैं की कलोक में टेम देखकै

तीन हाथ एरियल उठै करबा अगवानी

बटण ऑन कर त्यार रेडियो होज्यावै है

जरणां खलबली सी मचज्यावै कानी कानी

देखां तू आती ही के बोले, सुणबानैं-

कान लगा राख्या साळी कै सागै सिस्टर

या मेरे ट्रांजिस्टर की स्विच नहीं खुलै है

तूं आती ही तुरत घूँघटो सो खोलै है

नई सभ्यता मांय पळयोड़ी, घणी पढ्योड़ी

तूं आती हिन्दी अंग्रेजी में बोलै है

स्कोर लिखने मुन्नू भट चोपनियूं ठावै

तो मुन्नें की माँ भी ठावै एक रजिस्टर

ऐयां साजन किरकिट की कॉमेण्ट्री सुणसुण

सुत्या सूत्या सुपनैं में भी बॉल उछाळै

सुत्या सूत्या सुपनें में ही फिल्डिंग करले

सूत्या सूत्या सुपनैं में ही विकिट सम्हाळै

इयां रात भर सुपनें में भी चैन नहीं है

चपरासी से लेकर देखो चीफ मनिस्टर

इसो रोग फैल्यो किरकिट को च्यारूं कानी

टिकट खरीद'र आगै बैठ्यो नुयो नुयो है

ताळी बजतां हीं स्हारै हाळै नै पूछै-

मनें बताये इबकै कै कै गोल हुयो है!

ऐंया का देखणियां तो बांमें मिलज्यावै

जो समाज में पढ्या लिख्या बाजै बालिस्टर

स्रोत
  • सिरजक : विश्वनाथ शर्मा विमलेश ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी