सिर को बाळ

डाडी नै बोल्यो

चानड़ी!

देखले, रोजिना

तेरै पर

उस्तरो फिरै है।

नीची नजर करकै

उत्तर दियो डाडी

भाया!

पण मैं तेरी जईयां

कोई का

मायत तो कोनी मारूं।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भगवतीप्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 11
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