जिनगाणी

जांणै चूलै में सुळगती

हेक अधसूखी थेपड़ी!

नीं तो बळै

अर नीं बुझै,

बस, कोरो करै है—

धूंवो धूंवो

अळखावणो धूंवो!

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत ,
  • सिरजक : पुरुषोत्तम छंगाणी ,
  • संपादक : भगवतीलाल व्यास
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