कांटै नै दाबती

जूती बोली-

‘मरीलिया!

म्हैं तेरै के सारै हूं’।

घायल कांटो

पडूत्तर दियो-

‘छागटी!

म्हैं जात को कांटो हूं

मरयोड़ा नै कोनी सतावूं’!

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो पत्रिका ,
  • सिरजक : भगवती प्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा
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