बेईमानां के लेखै

कस्यो ईमान!

ईमान दीखै

ईमान सूझै।

ईमान तो चत सूं

करम को

जोड़ छै।

ज्यो नै

भुगतै

ऊं नै पड़ै छै

ईमान की तोल।

स्रोत
  • सिरजक : जितेन्द्र निर्मोही ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
जुड़्योड़ा विसै