सलीब पै

टंक्योड़ी है

ईसामसीह ज्यों

घणी

मिनखा देह।

पण लोग

देख नीं सकै।

मींची है

वां री आंख्यां।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : हरदान हर्ष ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 19
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