सोसण खोसण रो जाळ तेज,

मरजादा मांटी में रळगी।

सै बातां झूठ मिलावट है,

आसा री बेल खड़ी बळगी॥

अब जामै पैली ही जण में,

बेईमानी घात गळै ढळगी।

बस काळी कमाई में बरकत,

नीति री बात नांकै टळगी॥

किसाण आत्म हत्या करल्या,

नौजवान भटकतो डोलै है।

देसी बोटां सूं जीतणियां,

भासा परदेशी बोलै है॥

कई मान मरोड़ां में मरगा,

धन-पशु आजादी नै चरगा।

जका रुखाळा छोड्या हा थे,

बै मोकै पर कान कतरगा॥

तेरी मेरी में भूता फेरी में,

आं री टाबरी तो पळगी।

पण थारै घरां रै मूंडै आगै

आजादी री टांग तिसळगी॥

बिना गाय गौ भक्त कहावै

भारत जैसी मौज कठै है

गौ भगतां रै घर पर देखो

बठै गाय रो खोज कठै है?

आखड़गा लाई लोभां में

उपदेश घणां झाड़्या करता

कुरसी मिलतांई भेड़ हुया

जो नार बण्या दहाड्‌या करता॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कृष्ण कुमारी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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