दूध रै नेड़ौ जाय सकै
फगत पाणी क्यूंकै वो इज
रैय सकै अेक मेक
उण रै सागै।
नीं तौ दूध
जावै फाट
अर कोई नीं जोड़ सकै
उण फाटोड़ै दूध नै।
जबर कियौ विधनां ई
जांवण दियौ बणाय
जिकां जमाय देवै दही
पण दही बणियां पाछै ई
औ पाणी नीं छोड़ै
उण रौ साथ
उणरै सागै मथीज’र
बणै निरवाळी छाछ
सुपना रै सिणगार
कितरौ सोवणौ है
दूध अर पाणी रौ मेळ।
नव रस में नांव दूध रो
इण री महमा रौ
नहीं है कोई पार
जलम सूं जुड़ियो है
मिनख रै सागै दूध
नागां अर दोवां नै
भावै छांटौ दूध रौ
फूल गंगा में
सिरावण सूं पैला
धोईजै दूध रै मांय
इण सारू राखजौ
हरमेस दूध सूं हेत।