1 

जिंदगी आवण-जावण है
हेत हित हँस बतळावण है
बेल पर फाळ फळ्यां पाछै—
जिंदगी छिण मुरझावण है।

2

मौत री सांझ धुंवै घुट ज्याय
चालती बाळद ज्यूं लुट ज्याय
चाक चौपाळ सांस री आस—
मौत निरमांण देय मिट ज्याय।

3  
आंख रै पांख नहीं उड जाय कठै
नैण में नेह घणौ रळकाय कठै
गिरवर गाढ़ी रात सरवर पलकां में—
गैण में नैण, रैण किण भांत कटै


स्रोत
  • पोथी : मोती-मणिया ,
  • सिरजक : लक्ष्मण सिंघ रसवंत ,
  • संपादक : कृष्ण बिहारी सहल ,
  • प्रकाशक : चिन्मय प्रकाशन