कारबार यो सिरमोर है, चंदा को रुजगार भायला।
मेरी मानो तो चंदा को शुरु करो व्योपार भायला॥
नहीं कदै भी कदै भी ठालौ रहणौ, रोजीना ई काम भायला।
पूजा, पर्व, त्यूंहार घणेरा, देता रैवै दाम भायला॥
छपवाल्यौ दस-बीस रसीदां, न्यारा-न्यारा नांव भायला।
और वसूलो रोज रोकड़ा, आमद रो आधार भायला।
मेरी मानो तो चंदा को शुरु करो व्योपार भायला॥
बिना, पर्व, ल्यूंहार बिना भी, चंदो थानै मिलतो रैवै।
बिना देव री पूजा कै भी, डंडो थारो पुजतो रैवै।
रैली कदै, कदै मंत्री सूं मिलणो है यूं कैतो रैवै।
राजनीति में भी मानैला, सै थारो अधिकार भायला।
मेरी मानो तो चंदा को शुरु करो रुजगार भायला॥
कदै नरम बण, कदै कड़ो रै, टेम देख व्योहार दिखावै।
धंधो यो बिन पूंजी रौ है, बातां ई हकदार बणावै॥
रोब झाड़णो, धमकाणो, यो धंधा को सिणगार बधावै।
चंदो जैयां मिलै बैयां ई लेणै में है सार भायला।
मेरी मानो तो चंदा को शुरु करो रुजगार भायला॥
कोई टैक्स नहीं ई माळै, शुध्द मुनाफा आळो धंधो।
उद्योगी, व्यापारी रोवै, फेरूं भी सै देवै चंदो।
कदै नहीं ई नै छू पावै, बाजारां में आयो मंदो।
घर में भरले माळ मजै सूं, सूती है सरकार भायला।
मेरी मानो तो चंदा को शुरु करो रुजगार भायला॥
बेकारी को यो इलाज़ है, और देस की सेवा भी है।
रोटी तो सै कोई खावै, ईं धंधा में मेवा भी है।
ठाठ-बाठ सूं रहणौ-खाणौ, दोन्यूं टेम कलेवा भी है।
फूलै-फलै सदा बधतो रै यो आछ्यो रुजगार भायला।
कारबार यो सिरमोर है, चंदा को व्योपार भायला।
मेरी मानो तो चंदा को शुरु करो रुजगार भायला॥