थाणै की दीवाल

बार घाली

मरीलियो।

मेरै आगै तो

पड़दो लटकाद्‌यो।

अहंकार गरज्यो

रांड!

जै तनै नही सुहावै

जनता वाळी जईयां

तूं भी

आंख मींचले।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भगवतीप्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 11
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