धणी,

लुगाई नै यूं बोल्यो–

पीहर सूं आई जद

डील पर थारै

चींथरो कोनी हो!

फूली-फूली क्यूं भटकै!

लुगावड़ी बोली,

हां सा!

अब तो डील पर म्हारै

चींथड़ा चींथड़ा लटकै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बेणुगोपाल भट्टड़़ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 11
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