इसा बचन सुणि ऊठियौ अंग मोड़े असळाक।

बाध कहै सुण बाधणी तजणौ खेत तलाकं।

तजणौ खेत तलाक कहाऊं केहरी।

सहौं गरज नहिं सीस माथै मेह री।

मरण तणौ भय मानि तज भागवै।

बाध जनम बेकाज लाज कुळ लाजवै॥

स्रोत
  • पोथी : अलवर री खटरितु झमाल ,
  • सिरजक : शिवबक्ष पाल्हावत ,
  • संपादक : नारायण सिंह भाटी ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी शोध संस्थान, जोधपुर