फिलमी संगीतकारां में कमल राजस्थानी अेक इसौ नाम है जिकौ पूरी तर्‌यां भारतीय शास्त्रीय अर लोकसंगीत सूं जुड़्योड़ौ है। हिन्दी फिलम ‘मेरे गरीब नवाज’ में दियोड़ै आपरै सदाबहार संगीत नै लोग आज तांई नीं भूल सकिया है। मीठी-मोवणी धुनां रै कारण आ फिलम हदभांत ई लोकप्रियता हासल करी। लारलै दिनां आ टी.वी. माथै ई दिखाईजी। आ फिलम आपनै गजब जस दिरायौ। चावा संगीतकार गुलाममोहम्मद रै बाद आप हिन्दी फिलमां में राजस्थान रौ कामयाबी सूं प्रतिनिधित्व कर रैया है। आज तांई अेक दरजन सूं ई बेसी फिलम में संगीत देय चुक्या है। तो इण बार प्रस्तुत है ‘माणक’ रै पाठकां सारू संगीतकार कमल राजस्थानी सूं हुई बाद-बतळाव। आ बात-बतळाव करी है—श्री राजू कादरी ‘रियाज’ बीकानेरी।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ : कमलजी, आपरौ जनम किण ठौड़ हुयौ?

 

कमल राजस्थानी : म्हारौ जनम बीकानेर में ई हुयौ।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ : आपरौ फिलमां कानी जावणौ किंया हुयौ?

 

कमल राजस्थानी :  दरअसल बाळपणै सूं ई म्हैं स्कूल अर स्टेज माथै गीत गाया करतौ हौ। घर-परिवार रौ वातावरण ई साज-संगीत सूं ओतप्रोत हौ। सुणणियां रै बार-बार हौसलौ बढायां मन में खयाल आयौ के फिलमां में गायौ जावै तो किसौक। पछै म्हैं आपरी लगन अर मैनत रै पाण साज बजावणा ई सीख ई लिया। सेवट सन 1955 में म्हैं बंबई नगरी पूगौ। बीं दिनां म्हैं ‘ऊंची हवेली’, ‘राजहठ’ इत्याद हिंदी फिलमां में कोरस गीत गाया।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ :  आप पछै गायक क्यूं नीं बण सकिया?

 

कमल राजस्थानी : मोटी बात तो आ ही के गायक बणणौ म्हारी किस्मत में नीं हौ। फेरूं बीं बाळपणै री आवाज ई अेक गायक बणण सारू अनुकूळ नीं ही। बीं बखत म्हारी आवाज गायिकावां जियां ही। बाळपणै री रात तो पछै हुवै जिसी ई हुवै, आप समझ सकौ हौ। इसा हालात में गायक बणण रौ सवाल ई नीं उठै।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ :  आपरी कुण-सी फिलम सै सूं लोक-प्रिय ही, जिकै सूं फिलमी दुनिया में आपरी पिछाण बणी?

 

कमल राजस्थानी : म्हारी आज तक री सै सूं कामयाब फिलम ‘मेरे गरीब नवाज’ है। इणरा गीत लोकप्रिय अर चरचित हुवण रै कारण ई म्हैं प्रकास में आयौ। मोहम्मद रफी रै गायोड़ा गीत ‘कल मेरी तरह मुझको सलाम आप करेंगे’ अर ‘या खुदा सोई किस्मत जगा दे’ ने अनवर रै गायोड़ौ गीत ‘कस्में हम अपनी जान की खाये चले गये’ घणा सराईज्या। वियां दूजोड़ा गीत ई पसंद करीज्या। इण फिलम रा गीतकार महबूब सरवर हा।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ : जिण बगत  आप ‘मेरे गरीब नवाज’ रौ संगीत देवण में लागोड़ा हा, उण बगत कांई आपनै मालूम हौ के इण फिलम रा गीत इत्ता जोरदार चालैला?

 

कमल राजस्थानी :  इण सवाल बाबत आपनै अेक किस्सौ सुणावूं। इण फिलम री गजल ‘या खुदा सोई किस्मत जगा दे’ री रिहर्सल रफी साहब रिकार्डिंग वाळै दिन दोपार अेक बजियां सूं सिंझ्या री पांच बजियां तांई म्हारै सागै करी छह बजियां रफी साहब माईक माथै आया। चार घंटा री करड़ी रिहर्सल रै बाद ई ओ गीत (गजल) बीस ‘टेक’ में ओके हुयौ। कदैई म्हैं ‘कट’ कर देवतौ तो कदैई रफी साहब दुबारा रिकार्डिंग रै वास्ते के देवता। इण तरियां जद रिकार्डिंग खतम हुयी तो रफी साहब री आंख्यां में आंसू हा। बां आपरौ पारिश्रमिक ई म्हनै देय दियौ।

 

गायक अनवर नै ई म्हैं घणी मैनत कराई। अबै तो आप खुद ई समझ सकौ के इसी स्थिति में भविस आछौ दीखै ई। म्हनै आ संतुष्टि ही के म्हारा सारा ई गीत घणा लोकप्रिय हुवैला। अर आ बात साची हुई।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ :  आपनै फिलमां में संगीत देवतां कितरा साल हुयग्या?

 

कमल राजस्थानी :  म्हैं लगै-टगै तीस साल सूं फिलमां में संगीत दे रैयौ हूं। ‘मेरे गरीब नवाज’, ‘पारो’, ‘ईद का सलाम’ इत्याद म्हारै संगीत दियोड़ी फिलमां आछी चाली। ‘ईद मुबारक’  ‘इस देश का यारो क्या होगा’, ‘आपसे प्यार हुआ’ अर ‘नाव और किनारा’ भविस में बेगी ई प्रदरसित हुवण वाळी फिलमां है। आं दिनां म्हैं फिलम ‘गैरतमंद’ में संगीत दे रैयौ हूं।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ :  आप फिलमां में संगीत किण भांत रौ देवौ अर क्यूं?

 

कमल राजस्थानी : म्हैं भारतीय शास्त्रीय संगीत में घणौ विस्वास राखूं। इण वास्तै म्हारौ संगीत ई पर इज आधारित हुवै। पश्चिमी संगीत पर आधारित धुनां म्हैं म्हारै गीतां में प्रयोग नीं करूं।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ :  पण आजकाल तो पाश्चात्य संगीत ई आपां रै अठै री फिलमां में घणौ दियौ जा रैयौ है?

 

कमल राजस्थानी : आ बात म्हैं स्वीकार करूं के आपां रै अठै रा संगीतकार विदेशी संगीत घणौ काम में ले रैया है। पण भारतीय परिवेश सूं दूर इण संगीत माथै आधारित फिलमी गीत स्थायी लोकप्रियता हासल नीं कर सकै, इण भांत रा गीत घणा नीं चालै। ओ इज कारण है के म्हैं हमेस म्हारी माटी सूं जुड़्योड़ौ संगीत ई देवूं। इण संगीत में ढळ्योड़ा गीत सदाबहार हुवै।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ : आप पैली धुन बणावौ या गीत मिलियां रै बाद धुन तैयार करौ?

 

कमल राजस्थानी : म्हैं हमेस गीत मिलियां रै बाद ई धुन तैयार करूं। आज तांई म्हैं कदैई पैली धुन बणा’र गीत रा बोल फिट नीं कराया है। म्हारौ मन नीं मानै के अेक संगीतकार पैली धुन बणा’र गीतकार नै दायरै में बांधै।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ : कोई-कोई गीत घणौ लोकप्रिय क्यूं हुवै?

 

कमल राजस्थानी : इतियास गवाह है के हमेस वे इज गीत घणा लोकप्रिय हुवै जिणां रा बोल अर संगीत मनभावणा हुवै अर गायक जिणां नै मन सूं गावै। तीनूं ई बातां रौ स्तरीय हुवणौ जरूरी है।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ :  फिलमी दुनिया में अेक संगीतकार रै रूप में पग जमावण खातर आपनै कांई-कांई संघर्ष करणौ पड़्यौ?

 

कमल राजस्थानी : म्हैं तो अेक बात जाणूं के संघर्ष सफळता री कुंजी है। जीवण में मकसद तांई पूगण खातर मैणत तो करणी ई पड़ै। म्हनै पैला दूजा संगीतकारां रौ सहायक बण’र रैवणौ पड्यौ। बसंत प्रकासजी रै साथै ‘भक्त गरु’ अर ‘नीलोफर’ फिलमां में सहायक हौ। उणर बाल बुल्लो सी. रानी रै साथै ‘अल हलाल’ अर ‘हकदार’ फिलमां में बतौर सहायक संगीतकार काम कर्‌यौ। फिलम ‘अल हलाल’ री कव्वाली ‘हमें तो लूट लिया मिलके हुस्न वालों ने’ घणी लोकप्रिय अबार तांई ई है। इणरै अलावा ‘आपसे प्यार हुआ’, ‘फिर बहार आई’, ‘बंटवारा’, ‘मीठे बोल’ इत्याद फिलमां में सहायक हौ।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ :  सहायक संगीतकार रै रूप में कोई फिलम जिणमें पूरौ-रौ-पूरौ संगीत आप ई दियौ हुवै?

 

कमल राजस्थानी : निरमाता दीप खोसला री फिलम ‘बंटवारा’ में संगीतकार अेस.मदन रौ सहायक हौ। पण इणमें पूरौ-रौ-पूरौ संगीत म्हारौ हौ। इणरा गीत ई म्हैं ई संगीत में ढाळ्या हा। मजरुह सुल्तानपुरी रौ लिख्यौ अर रफी-आशा रौ गायोड़ौ गीत ‘ये रात ये फिजा फिर आये या न आये/आओ शमा बुझाकर हम शमा जलाये’ श्रोता आज तांई नीं भूल सक्या है।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ : कांई आपरौ ई कोई फिलम बणावण रौ इरादौ है?

 

कमल राजस्थानी : हां। आं दिनां अेस.के. फिल्म्स प्रोडक्शन रै बैनर तळै म्हैं अेन. अेन चौबे रे निरदेसण में हिन्दी फिलम ‘गैरतमंद’ बणाय रैयौ हूं। इण फिलम रौ निरमाता म्हारौ बेटौ अमीन डग्गा है। करीब आधी फिलम बण चुकी है। नजीक भविस में आ फिलम ‘रिलीज’ हुय जासी-उम्मीद आ इज है।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ :  फिलम ‘गैरतमंद’ में कुण-कुण सा कलाकार काम कर रैया है?

 

कमल राजस्थानी : इण फिलम में राजकिरण, रवप्न। राजन सिप्पी, दिव्याराणा, ओमपुरी, डॉ. सुनंदा, गुलशन ग्रोवर इत्याद मुख्य कलाकार है। अेक खास भूमिका में चरचित अर सदाबहार कलाकार धर्मेन्द्र ई इण फिलम में है। गीतकार महबूब सरवर अर म्हारै संगीत निरदेसण में इण फिलम रा चार गीत मोहम्मद अजीज ‘मुन्ना’, अनवर, अनुराधा पौडवाल अर अलका याज्ञिक री आवाजां में रिकार्ड हुय चुक्या है।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ : आप नवा पार्श्वगायक अर पार्श्व गायिकावां नै फिलमां में गावण रौ मौकौ दियौ कांई?

 

कमल राजस्थानी : हां, दियौ है। जद-जद ई म्हनै मौकौ मिलै, नवा गायक-गायिकावां नै म्हूं गवावूं। पार्श्व गायक अनवर म्हारी ई खोज है। अनवर नै सबसूं पैली म्हैं फिलम ‘मेरे गरीब नवाज’ में अेक गजल ‘कस्में हम अपनी जान की खाये चले गये’ गवावण खातर फिलमां में लायौ। लोग इणरी आवाज नै रफीसाहब री आवाज समझ्या हा। इण तर्‌यां अनवर रौ फिलम जगत में आवणौ हुयौ। आज ई अनवर म्हारी घणी इज्जत करै। म्हैं म्हारी दूजी फिलमां में ई अनवर सूं गीत गवाया। अेस. जानकी अर पी. सुशीला नै ई म्हैं प्रोत्साहन दियौ।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ :  आप राजस्थानी हुवण रै नातै अठै रा गायक-गायिकावां नै आपरी फिलमां में गवाय रैया हौ के नीं?

 

कमल राजस्थानी : राजस्थानी लोक गायक बदरुद्दीन मालावत नै म्हैं फिलम ‘गैरतमंद’ में गीत गवाय रैयौ हूं। इण गायक री आवाज फिलमां रै अनुकूळ है। म्हनै पूरी उम्मीद है के ओ पार्श्व गायक रै रूप में सफळ हुय सकै, इणरै मारग-दरसण री जरूरत है अर ओ काम म्हैं कर रैयौ हूं ताकै फिलमी गायकां में राजस्थान रौ नाम हुय सकै।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ : आप राजस्थानी भाषा में फिलम क्यूं नी बणावौ जदकै आप राजस्थान में जाया-जन्म्या हौ?

 

कमल राजस्थानी  :  राजस्थानी मायड़ भाषा है। इणरै खातर म्हनै ई बौत कीं करणौ चाइजै। राजस्थान सरकार म्हारी कीं मदद करै तो म्हैं राजस्थानी फिलम बणावण में कत्तई नीं हिचकूं। दूजै प्रदेसां री सरकार उठै रा निरमातावां नै बौत सैयोग देवै। म्हारै मन में राजस्थानी फिलम बणावण री इंछा है। जे राजस्थान सरकार सैयोग देवै तो सोनै में सुगंध हुय जावै।

 

राजू कादरी ‘रियाज’ : ‘माणक’ आपरै निजरां दीठी पत्रिका है। इण बाबत आपरा कांई खयाल है? 

 

कमल राजस्थानी : भाषा रै पाण ई संस्कृति आगै बढै। ‘माणक’ मायड़ भाषा राजस्थानी रौ प्रचार-प्रसार करण रै साथै-साथै आपां री संस्कृतिक परंपरावां नै बचावण री अणमोल काम कर रैयी है। ‘माणक’ रौ प्रकासण राजस्थानी भाषा नै अेक दिन जरूर मान्यता दिरा’र रैसी। इणनै देख’र इयां लागै जाणै संपूरण राजस्थानी संस्कृति इणमें बस्योड़ी है।

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थानी मासिक) ,
  • सिरजक : कमल राजस्थानी सूं राजू कादरी ‘रियाज’ री बंतळ ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकासण ,
  • संस्करण : फरवरी 1987
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