अेक - मां
जीव सूं बेसी
सांस सूं सांस पाळै
नव महीना!
दोय - लू
सूरज-कूटी
रीसां बळती हवा
उछाळै खीरा!
तीन - लाज
म्हैं पूछ्यो-कद
अंग हुयग्या लाल?
बा बोली–‘धत्’
च्यार - हलाल
रमती सांसां
मालक थारी में’र
कफ में खून!
पांच - हैंगर
लटकावतां
खुद लटक्योड़ा है
लाई ‘हैंगर’!
छः - जोबन
कठै आराम?
जद सूं आयो बैरी
नींद हराम!
सात - कु-राज
रात-कचेड़ी
अंधारो लिखै नित
सूरज नै फांसी!
आठ - चेतना
बूझै ना मिटै
जुगां सूं जगै अठै
जोत अखंड!
नौ - बुक्को
बळता खीरा
चाखतांई ठा पड़ी
मिश्री री डळी!
दस - आंतक
घरां में लोग
सांस रोक’र सुणै
बाजता बूंट?