ठांण बंध्या हुयग्या पळगोड

जा आंनै जंगळ में छोड

अन्नदाता री आणदुवाई

चरै जियांनै खुल्ला छोड

इलैजी पारखिया घोड़ा

जीतैला अै होडाहोड

साख उजाड़ै सू’र दंताळा

सौ सौ क्रोड कुटीजै भोड

रैय्यत है आजाद राज री

पगां बेड़ियां लकड़ी गोड

जिणरा हाथ रंग्या बै रांगड़

वांरी डांगां अपणी गो

स्रोत
  • पोथी : राजस्थली ,
  • सिरजक : नवल जोशी ,
  • संपादक : श्याम महर्षि ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी साहित्य संस्कृति पीठ (राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति)