बण कांगरा माळियै चढ़ जावणौ सोरौ घणौ
भार नमती नींव में गड जावणौ दोरौ घणौ
घूघरा घमकाय नाचै केई मीरा पांव में
चित्त मोहन चाढ़नै रीझावणौ दोरौ घणौ
थां अडाणै मेल दौ इण देस री आजादी नै
बण भगतसिंह फांसियां चढ़ जावणौ दोरौ घणौ
आज कोरी बातां करलौ है कठै सेलाणियां
मरियादा रौ माथौ बण कट जावणौ दोरौ घणौ
पन्ना वाळा पाठ लागै, छिपगा जाणै है अठै
बेटै वाळी बोटियां कट जावणौ दोरौ घणौ
कुरसियां रौ मोह कितरौ, राम रै इण देस में
कैकई वन कैवतां झट जावणौ दोरौ घणौ
बण कांगरा माळियै चढ़ जावणौ सोरौ घणौ
भार नमती नींव में गड जावणौ दोरौ घणौ।