आंखियां रौ बवार देखूंला

धुंध रै आर-पार देखूंला

देखली आपरी अणूताई

आज खुद रौ तुमार देखूंला

जाणै पासौ कदै पलट जावै

दांव म्हैं भी लगा'र देखूंला

नख-निवाई भी आस कोनी है

कांकरा वार वार देखूंला

रात री खाक में है टाबरियौ

आंगणै में उतार देखूंला

मौत, मनवार सूं नहीं मूंगी

जिंदगाणी गुजार देखूंला

वौ बकारै, घड़ी-घड़ी भर में

देखलूंला, अबार देखूंला

स्रोत
  • पोथी : अपरंच राजस्थानी भासा अर साहित्य री तिमाही ,
  • सिरजक : सत्येन जोशी ,
  • संपादक : गौतम अरोड़ा