आभै में है खळ-बळ

धरती ऊपर हळचळ

चांद उग्योड़ा अणगिण

हिवड़े में है झळ-झळ

न्हाठै लोग फरराट

ओछी जिंदगी पळ-पळ

छत सड़कां एक हुई

भाठा भी है दळ-दळ

आज अपणा भी लोग

जोवै तो है टळ-टळ

सदियां जूनी मूरत

रोळी उतरै रळ-रळ

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत ,
  • सिरजक : आनन्द 'प्रिय' ,
  • संपादक : माणक तिवारी 'बंधु'