शक्ति रो अभिषेक
देवता भी करता आया है
स्वाभिमान री उरजा बण
मैं गीतां नै गाया है।
सूर, कबीरा रो चेलो हूं
तुलसी रो वंशज हूं
महाराणा, मीरां जलमी,
मैं बैं धरती री रज हूं।
भाव जगत रो सूरज बणकर
मैं तपतो आयो हूं,
और चांदनी री सौगातां
सबदां में ल्यायो हूं,
ढोल, मंजीरा, छिम-छिमियासा
संगळिया पाया है।
संयम रै झूलै पर झूलै
जियां पून इच्छा री
बांध लंगोटी घूमै
बीं नै कमी कठै भिक्षा री
बै गावां सूं, अै पोळ्यां सूं
सगळा हेलो मारै
आव-भागत उणरी होवै
जो, मन मैं बात उतारै
आंसूड़ा होळै सूं हंसकर
फूलड़ा सा मुस्काया है।
स्वाभिमान री उरजा बण,
मैं गीतां नै गाया है।