ओ पाड़ोसी सांढ तूं तो
टांडै जैयां टांड
म्हे हां गांधीवादी म्हे तो,
गाल राख्या मांड
म्हारा ओ पाड़ोसी सांढ…
म्हारै सिर पर आ चढग्यो
तूं म्हे कांई ना बोल्या।
म्हारै घर मै जहर घोळ दियो
गेर्यो डोळ्यां-डोळ्यां
बांध-बांध के पांड
ओ पाड़ोसी सांढ तूं तो।
जद-जद रूस्यो ,तनै मनावां
भाया-भाया करके,
फिर भी तूं बन्दूक चलाई,
ओरां कांधै धरकै।
नई नवेली बीनण्यां का कर दिया बेहाल
म्हारा ओ पाड़ोसी सांढ तूं तो
आपां दोन्यूं भाई-भाई अेक मायड़ का पूत
चोखा कोनी लागां आपां
होवां जूत-म-जूत,
म्हे तो रोज मनावां तनै…
तूं माच्यो जावै नाढ
ओ पाड़ोसी सांढ तूं तो।
नाम कै आगै सिंग लगावां,
चोखी राखां अकड़
मूंडों कानी कर देवा म्हे जद कोई मारै थप्पड़
बात-बात पर रंग बदळां म्हे हिन्दुस्तानी भांड
म्हारा ओ पाड़ोसी सांढ तूं तो
म्हारी छाती मूंग दळै है,
तूं मन मानी करके,
फिर भी म्हे आवां-जावां हां
छाती करड़ी करके—
अबकी जे तूं ना मान्यो
तेरी करड़ द्यांगा काढ़
म्हारा ओ पाड़ौसी सांढ।