कण-कण में कड़पाण,भरै जुगभाण जठै

रंगरूड़ो मरुदेस,मिनख रो माण जठै!

धोरड़ियां रै बीच, धरम री धरती है

तावड़िया में तपै, ठंड में ठरती है

रूंखा छाई रेत, रतन रंग रळती है

मिजमानां मनुवार, मुळकती करती है

माटी री मै'कार, मक्खण मिस्टाण जठै

रंगरूड़ो मरुदेस,मिनख रो माण जठै!

पुस्कर तीरथराज, परम रजधानी है

ॠसभदेव री ओट, धरम सब मानी है

धिनो झोरड़ा धाम, सकल जग जाणी है

फौजां री रिछपाळ, तनोट धिराणी है

काबां वाळी करणी, मा देसाण जठै

रंगरूड़ो मरुदेस,मिनख रो माण जठै!

पाबू, गोगा, रामदेव पंच पीरां में

स्यामधणी खाटू, घर-घर तस्वीरां में

जाम्भोजी री सीख, जगत में न्यारी है

ख्वाजा रो अजमेर, जोहड़ गुरुवां री है

तेजा री तपभौम, धरा नागाण जठै

रंगरूड़ो मरुदेस,मिनख रो माण जठै!

झीलां री जागीर, उदैपुर मगरी है

हवा महल री साख, गुलाबी नगरी है

अभिमानी चित्तौड़, देस री पगड़ी है

जबरो जैसलमेर, ऊंठ धन सागड़ी है

हाड़ौती, कुरू, माळ, जांगळ, जोधाण जठै

रंगरूड़ो मरुदेस,मिनख रो माण जठै!

पीळै बादळ पूग, खेत री पांथां में

पच -पच बाळै चाम, पसीनो माथां में

माणस खुद तकदीर, लिखै निज हाथां में

मैं'णत हरखै मोद, उबळती बाथां में

सांसां रै संगीत, जीवण जसगाण जठै

रंगरूड़ो मरुदेस,मिनख रो माण जठै!

मरद गरजता सिंघ, ढाल हिंदवाणी है

रमतोड़ा रणवीर, जुद्ध अगवाणी है

पाथळ अर परताप,अमर मेवाड़ी है

पीथळ ,दुरगादास, रखी रजवाड़ी है

स्वाभिमान हित सदा, समरपित प्राण जठै

रंगरूड़ो मरुदेस,मिनख रो माण जठै!

जौहर री जड़ नार, नंगी तलवारां है

मरजादा रै समंद ,रमै रणधारां है

मातृभौम पर भेंट, पूत पन्नां रा है

पद्मणियां पण धार, चढी अंगारां है

पीवै विस रा घूंट, मीरां पै'चाण जठै

रंगरूड़ो मरुदेस,मिनख रो माण जठै!

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुनियोड़ी ,
  • सिरजक : प्रहलादसिंह झोरड़ा
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