रंग रसे गंठजोड़ दिपसाह बर रळकती,
हळकती बरी पोसाग हेली।
खीज सिर सेख रै भवानी खळकती,
पळकती बीज हथ दूर पेली।
गाज कर गहर असमान सिर गड़कती,
धड़कती राव सिर धाड़ धेकी।
कान सुण मेहाई चंवरियां कड़कती,
बड़कती अकाळा टाळ बेकी।
लगन फेरां बीच चूड़बाजी खळळ,
हळळ जागी अगन कहळ हाली।
भळळ सिर भूपरै करळ मांची भचक,
झळळ भुज किनीयांणी पळळ झाली।
गिगन सिर गरड़कर करड़ भुड़ बरड़गै,
झड़ड़ धड़ धरड़ तड़ खरड़ झाड़ी।
एळा न्रप हरड़ होए अरड़ खग ऊसरी,
फरड़ भुज करनला बीज फाड़ी।
भाटियां पतेसर छूटती भटानै,
तूटती पटानै आस तोकै।
आभरी बूठती घटा नै पड़ैआ,
रूठती छटानै तूंहि रोकै।
अमर कीन्ही कथन अेळासर इणी री,
पूगळा धणी री बिपद पेली।
करनला कळा निज ध्यान रा करा सूं,
झळां असमांन री अधर झेली।
बरण गुण चावळो सुकव संकर बदै,
दास हुय रावळो सरण दाई।
जोत जगदीसरी भाव रै भजन सूं,
ईसरी राव रै मदत आई।