उरं आद्रके सास अभ्यास आणे।
वडा जूह पूंतारिया पीलवाणे॥
गंडा मारि वेसारिया नीठि गज्जं।
रुआमाल फेरै करै झाड़ि रज्जं॥
तियां चोपड़ै तेल सिंदूर तन्नं।
वयंडा वणावै घणूं स्याम व्रन्न॥
नाड़ी भीड़ियां अंग लग्गा निहंग।
जटा जूट संनाह जे कोड जंगं॥
कसे पाखरां चामरां जूह काळा।
वणे जाणि पाहाड़ हेमंग वाळा॥
धजां फाबि नेजां गजां सीस ढल्लं।
माथै उड्डिया जाणि गुड्डी महल्लं॥
पटे ऊपटे मद्द धारा पटाळं।
खळक्कै गिरा मेर ते नीर खाळं॥
प्रळै काळ छंछाळ छूटा पटाळं।
क्रमै डारणा कारणा भूत काळं॥
लुड़ै छाकिया काळ ज्यूं डाण लग्गे।
पखे पार ताणै जिके लोह पग्गे॥
सझै झाड़ि उप्पाड़ि अैसा सनड्ढं।
गढां पाड़ि वेछाड़ि औछाड़ि गड्ढं॥
कुलं अट्ठ चल्लै गिरं गज्ज काळा।
मंडै इंद्र जाणै घटा मेघमाळा॥
फबै बग्ग पंती अगा दंत फाज्जं।
गजां वाज वीजां खिंवै सीस गज्जं॥
कपोलं गजं चोल सिंदूर केसं।
ओपै इंद्र धानंख जैसा अरेसं॥
तियां मांहि ऊभी वणै रेख तासं।
पबै उप्परै जाणि फूले पलासं॥
दळां रोळ दंताळ अैसा दुगम्मं।
जमं चालिया सामुहां जाणि जम्मं॥
रजी ऊमड़ै व्योम नूं रोस रत्ता।
धुवां धार चारक्खियां धत्तधत्ता॥
रजी धोम सूं वींटिया गज्ज राजै।
वडे अन्नडे जाणि रींछी विराजै॥
भयाणकं भैभीत सोभंत भारं।
क्रमै जाणि आधी निसा अंधकारं॥
इसा गज्ज घंटाळ घंटा अपारं।
त्रिण्है लोक कौतिक्क देखंत त्यारं॥
दुवै फौज फब्बै गिरं गज्ज डाणै।
उभै जाणि आडावळा खेत आणै॥