भजन किया दुख भाजसी जी, ऐतो सिंवर्‌या राम निवाजसी जी।

रसना में रस आविया जी, मिसरी सा स्वाद लखाविया जी।

गले गदगदा दूजा सुख हिरदा, हिरदा में राम पधारिया जी।

हिरदा हलै फुरकाह चलै, मुरली की टेर सुनाविया जी॥

स्रोत
  • पोथी : श्री रामदास जी की बाणी ,
  • सिरजक : रामदास जी ,
  • संपादक : रामप्रसाद दाधीच 'प्रसाद ', हरिदास शास्त्री ,
  • प्रकाशक : श्रीमदाद्य रामस्नेही साहित्य शोध - प्रतिष्ठान, प्रधान पीठ,खेड़ापा जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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