अपछर शिव सकति विधि इम आखै।

आया जुध नूंतिया अठै॥

कद अब खळां छोडसी केड़ो।

कह हाडा पौढसी कठै॥

परी ईस जोगणि खग प्रभणै।

सात पहर बीता जुध साल॥

गुड़सी कठै कवळ खग गामां।

पड़सी किण ठामां पूंवाळ॥

रंभा भव काळी दुज रूठे।

हाडा बळवँत रतन हरा॥

अब कर किता तोड़सी आवध।

धड़ केता लोटसी धरा॥

सिर वर रुधिर दिये पळ सूरां।

बिधी पिंड कर पितर विधान॥

धड़ भृंग उडियौ खग धारां।

सजि च्यारां पूरौ सनमान॥

स्रोत
  • पोथी : प्राचीन राजस्थानी गीत (भाग – 5) ,
  • सिरजक : चंडीदान मिश्रण ,
  • संपादक : हनुवंत सिंह देवड़ा ,
  • प्रकाशक : साहित्य संस्थान, राजस्थान विश्व विद्यापीठ, उदयपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै