आरती करू गुरु हरिराम देवा,ब्रह्म विलास अगम घर भेवा।
आये सत ब्रह्म व्यौपारी, राम नाम बिणजै बहु भारी।
ज्ञान- ध्यान अणभै अणरागी, रूम रूम में झालर बागी।
इला पिंगला सुषमणा भोगी,अटल अमर अणभै गत जोगी।
सील संतोष साच सतधारी, सता समाध सुन्य सूं यारी।
आय रामियो सरण तुमारी, पल-पल ऊपर प्राण अवारी।।