सावण साजन रै हियै, प्रीत रह्यौ उमड़ाय।

तन माया रै जाळ में, मन मुरलीधर मांय॥

स्रोत
  • पोथी : सूळी ऊपर सेज ,
  • सिरजक : कविता किरण ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन