सात समंदर पार तक, इण धर री आवाज।

करी बुलंद गांधी प्रबळ, नानाविध व्है नाज॥

सत्याग्रह कर सांपरत, साची देवण सीख।

गांधी बणवाई गजब, लोक तणी नव-लीक॥

आंदोलन करिया इळा, अनमी पुरस अनेक

झुकियो नीं जबरैल औ, नीयत राखी नेक॥

आज धरा है अणमणी, आभो ई उदियास।

दूत शांति रो कठै, किण मग करै विलास॥

आप्यो आखै जगत नै, शांति रो संदेश।

जुग-जुग चलसी वारता, सूरा हंदै देश॥

मान बधायौ मुलक में, पुहुमी पर पहचाण।

रहयो खरो सिद्धांत रख, तोप अहिंसा ताण॥

डिगियो न डकरैल कद, झुकियो नीं लवलेश।

रुकियो नांही राह में, हरवळ रहयो हमेश॥

दुखी जनां नै देखनै, हींयै हुवै जद टीस।

गांधी रो सिमरण हुवै, सदा झुकै लख शीश॥

निंवण! निवण! नर ऊजळा, परभाते प्रणाम।

सही दिया सिद्धांत थे, तम नै मेट तमाम।

करवाया गांधी जबर, आंधी बण आजाद।

अजै सुणीजै अंबरां, नरां! अहिंसा-नाद॥

स्रोत
  • पोथी : आजादी रा भागीरथ : गांधी ,
  • सिरजक : महेंद्रसिंह छायण ,
  • संपादक : वेद व्यास , श्याम महर्षि ,
  • प्रकाशक : राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति ,
  • संस्करण : 1
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