नवि परणावउ डीकरी, नवि आपउ बेऊं मीर।

हाथी गढ आपउ नहीं, इसउ कहइ हम्मीर॥

तुं सरिखा सुरताणसुं, करइ विग्रह निसदीस।

हमीरदे कहीयउ इसउ, तउइ न नामइ सीस॥

सउ बरसां नु संचीयउ, धान चोपड़ गढ माहि।

चहुवाण कहइ इसउ, रामति करि पतिसाह॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीरायण ,
  • सिरजक : भांडउ व्यास ,
  • संपादक : भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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