काम क्रोध मद लोभ नहिं, खट विकार करि हीन।

पंथ कुपंथ जानही, ब्रह्म भाव रस लीन॥

स्रोत
  • पोथी : दया बोध ,
  • सिरजक : दयाबाई ,
  • प्रकाशक : बेलडियर प्रेस , प्रयाग