जग में जगमग मोकळी, घर में हाहाकार।

बारै उजळो चानणो, मांहे घोर अंधार॥

स्रोत
  • पोथी : सूळी ऊपर सेज ,
  • सिरजक : कविता किरण ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन