जद सूं संसद में गयो, होरी रो हरलाल।

गळबा लागी सब जगां, अब धन्नो री दाळ॥

घरवाळी नवरंग की, जद सूं बणी प्रधान।

साथ साथ घर रै हुयो, चमचां रो उत्थान॥

जद सूं उपमंत्री बण्यूं, दोलत रो दिलबाग।

बीं कै जळबा लागगा, घी रा नुवां चिराग॥

जद सूं एम.एल.ए. बण्यूं, सरमा रामोतार।

बीं कै घर आकास सूं, टपक्या बंगला-कार॥

चमचां रै संग दळ-बदळ, मंतरी बण्यूं महेस।

देस छोड जावण लाग्यो, बो अकसर परदेस॥

पैल्यां साऊकार रो, अब सरकारी लोन।

करजा रो गांव सूं, भूत भगावै कौण॥

उजड़ गया जद बाढ़ सूं, लोगां रा घर बार।

दौरा पर अफसर गया, दौरा पर सरकार॥

आहत हर घर गांव नै, करगो फेर अकाल।

राहत पा अफसर हुया, फेरूँ मालामाल॥

दान गयो देस सूं, दानी गया महान।

अब करबा नै रह गयो, बस केवल मतदान॥

पैल्यां जिसा गांव में, है त्यौंहार तीज।

राजनीति नै फूट का, घर-घर बोया बीज॥

काल तलक जो झेलर्‌या थो, अभाव ही रोज।

मंतरी बण गंगू बण्यू, अब तो राजा भोज॥

रिश्वत खोरी रो लग्यो, कद छूबा आकास।

भ्रष्टजणा देस में, केवल कर्‌यो विकास॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कुन्दन सिंह सजल ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन, पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-19
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