1

धधक धधक बरस्यो जतो, घण अम्बर सूँ आग।
भभक भभक भभक्यो उतो, बाँबी-छेड़यो नाग॥

2

वैड़ो वैड़ो ही खड्यो, रहयो गिरातो गाज।
किम्मत घटी न रंच भी, हिम्मत तो पै नाज॥ 

स्रोत
  • पोथी : मोती-मणिया ,
  • सिरजक : भँवरसिंह सहवाल ,
  • संपादक : कृष्ण बिहारी सहल ,
  • प्रकाशक : चिन्मय प्रकाशन
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