भगती-भजन भुलाय नै, पैलां भोग्या भोग।

अब भुगते हैं जीवड़ो, भव रा भीषण रोग॥

स्रोत
  • पोथी : सूळी ऊपर सेज ,
  • सिरजक : कविता किरण ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन